गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : रविवार को फरहान अख्तर की आने वाली फिल्म ‘120 बहादुर’ को लेकर अहीर समाज ने खेड़की दौला टोल से दिल्ली रजोकरी बॉर्डर तक पैदल मार्च निकाला। जिसकी वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग 48 (NH-48) पर भीषण जाम लगा रहा। जयपुर से दिल्ली जाने वाले वाहनों को घंटों तक जाम में फंसे रहना पड़ा। अहीर समाज का आरोप है कि फिल्म का शीर्षक ‘120 बहादुर’ 1962 के भारत-चीन युद्ध में रेजांगला की लड़ाई में शहीद हुए 114 अहीर सैनिकों का अपमान है। समाज की मांग है कि फिल्म का नाम बदलकर ‘120 वीर अहीर’ किया जाए। अहीर नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि अगर फिल्म का नाम नहीं बदला गया तो इसे हरियाणा में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा। इस प्रदर्शन की वजह से हजारों वाहन चालकों को घंटों जाम में फंसना पड़ा और टोल प्लाजा पर टैक्स संग्रह भी प्रभावित हुआ।*खेड़की दौला से दिल्ली बॉर्डर तक रहा पैदल मार्च*रविवार सुबह अहीर समाज के सैकड़ों नेता और समर्थक खेड़की दौला टोल प्लाजा से पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा लेकर नारेबाजी की और NH-48 पर सड़क पर उतर आए। इस दौरान वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। जयपुर, अलवर और राजस्थान के अन्य शहरों से दिल्ली आने वाले हजारों वाहन घंटों जाम में फंसे रहे। जाम की लंबाई कई किलोमीटर तक फैल गई। टोल प्लाजा को भी प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया, जिससे टैक्स संग्रह का काम रुक गया। कई यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में कई घंटो तक भीड़ में खड़ा रहना पड़ा।
*हरियाणा में रिलीज नहीं होने देंगे फिल्म*
अहीर नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा, “आज हम तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं। हम फिल्म निर्माता और निर्देशक को चेताना चाहते हैं कि जल्द से जल्द इस फिल्म का नाम बदलें, वरना इस फिल्म को हरियाणा में रिलीज नहीं होने देंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माता को अहीरों की शहादत को दिखाने से पहले उन शहीद परिवारों से बातचीत करनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो सरकार को इस फिल्म पर बैन लगाना चाहिए। यादव ने साफ कर दिया कि किसी भी सूरत में वे इस फिल्म को सिनेमा हॉल में रिलीज नहीं होने देंगे। अहीर समाज का कहना है कि यह सिर्फ एक फिल्म का सवाल नहीं है, बल्कि उन 114 शहीदों की इज्जत का सवाल है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी।इस प्रदर्शन की वजह से NH-48 पर भारी जाम लग गया और हजारों वाहन चालकों को असुविधा झेलनी पड़ी। दिल्ली एयरपोर्ट जाने वाले कई यात्री अपनी फ्लाइट मिस कर गए। ऑफिस जाने वाले लोग घंटों सड़क पर फंसे रहे। एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी वाहनों को भी रास्ता नहीं मिल पाया। कई लोग सोशल मीडिया पर प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। लोगों का सवाल है कि नेशनल हाईवे पर इतने बड़े पैमाने का पैदल मार्च निकालने की परमिशन किसने दी? क्या प्रशासन को पहले से इस प्रदर्शन की जानकारी नहीं थी? अगर थी तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
*कैसे बना यह विवादित मामला*
फिल्म ‘120 बहादुर’ 1962 के भारत-चीन युद्ध में रेजांगला की ऐतिहासिक लड़ाई पर आधारित है। इस लड़ाई में 13 कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी के 114 अहीर सैनिकों ने चीनी सेना के खिलाफ अदम्य साहस दिखाया था। ये सैनिक तब तक लड़ते रहे जब तक उनके पास एक भी गोली बची। इन बहादुरों को ‘वीर अहीर’ की उपाधि दी गई है। यह भारतीय सेना के इतिहास की सबसे वीरतापूर्ण लड़ाइयों में से एक मानी जाती है। अहीर समाज का कहना है कि फिल्म का टाइटल ‘120 बहादुर’ गलत है क्योंकि असल में 114 शहीद हुए थे, न कि 120। इसके अलावा ‘बहादुर’ शब्द का इस्तेमाल इन शहीदों का अपमान है क्योंकि उन्हें ‘वीर अहीर’ की उपाधि मिली हुई है।*समाज की फिल्म निर्माताओं से मांग*अहीर समाज की मांग है कि फिल्म का टाइटल बदलकर ‘120 वीर अहीर’ या ‘114 वीर अहीर’ किया जाए। समाज के प्रतिनिधि चाहते हैं कि फिल्म बनाने से पहले शहीदों के परिवार वालों से बातचीत की जाए और उनकी सहमति ली जाए। उनका कहना है कि यह फिल्म केवल कमाई का जरिया नहीं बननी चाहिए, बल्कि इसे उन शहीदों के सम्मान में बनाया जाना चाहिए। फिल्म निर्माताओं को ऐतिहासिक तथ्यों का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। अगर ये मांगें नहीं मानी गईं तो अहीर समाज ने हरियाणा में फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने की धमकी दी है। फिल्म में फरहान अख्तर मुख्य भूमिका में हैं और यह 2025 में रिलीज होने वाली है।
*क्या है 1962 की रेजांगला लड़ाई का इतिहास*
18 नवंबर 1962 को लद्दाख के रेजांगला में 13 कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी ने चीनी सेना का सामना किया था। मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में 114 अहीर सैनिकों ने 3000 से अधिक चीनी सैनिकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। -10 डिग्री तापमान में बिना पर्याप्त गर्म कपड़ों और कम गोला-बारूद के बावजूद इन जवानों ने दुश्मन को आगे नहीं बढ़ने दिया। 114 में से 113 सैनिक शहीद हुए और केवल एक घायल बचा। इस वीरता के लिए मेजर शैतान सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह लड़ाई भारतीय सेना की बहादुरी की मिसाल बन गई है।
*शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि या नेतागिरी चमकाना*
अहीर समाज द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन के बारे में बुद्धिजीवों की अलग-अलग राय है। जिसपर चर्चाएं हैं कि अहीर समाज फिल्म के नाम को बदलवाकर क्या संदेश देना चाहता है। जबकि अहीर समाज में कई बड़े-बड़े फिल्म निर्माता गुड़गांव में निवास करते हैं। वह अपनी जाति और कुर्बानी को बेहतर तरीके से समाज के सामने रख सकते हैं। लोगों का कहना है कि यह मामला तो केवल अपनी नेतागिरी चमकाने जैसा दिखाई देता है। अगर अहीर समाज सच में ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहता है तो उनको अपने अन्दर शहीदों जैसी देश भक्ति और भाईचारे की भावना पैदा करनी होगी। जो कि समाज के लोगों में आजकल दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। सड़कों पर धरने प्रदर्शन कर हुड़दंग मचाना कहां तक की समझदारी है। शहीदों का नाम लेकर अहीर अहीर का रट्टा लगाने वाले कुछ छुटभैय्ए नेता केवल अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए समाज का नाम खराब कर रहे हैं। इस तरह के सैकड़ों नक़ली समाजसेवी केवल सरकारी जमीनों पर कब्जें कर कर अवैध वसूली के धंधे में लगे हुए हैं। जिनमें बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों से संबंध रखने वाले अहीर समाज के पदाधिकारी पार्षद व पूर्व पार्षद तथा उनके परिवार है।

