गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम की एक एडीजे अदालत ने करीब 9 साल तक चले एक संवेदनशील मामले में अहम फैसला सुनाते हुए वर्ष 2017 में दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने (एबेटमेंट टू सुसाइड) के केस में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। यह मामला थाना पालम विहार में दर्ज किया गया था, जिसमें पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे थे।न्यायालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में थाना पालम विहार में मुकदमा संख्या 48 दर्ज किया गया था। यह मामला मृतक के भाई पुष्पक कुमार निवासी कनीना की शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ था, जिसमें मृतक भरत भूषण की पत्नी रजनी,भाई दीपक व ज्योती तथा अश्वनी भाटिया को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट अदालत में पेश की थी।
जबकि इस मामले में एक आरोपी अश्वनी भाटिया को पहले ही हाई कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज कर दिया गया था। शेष आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी रहा, जिसमें अभियोजन पक्ष की ओर से वकील धनंजय कुमार और बचाव पक्ष की ओर से वकील जगजीत चौधरी ने 13 मार्च 2026 को अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। इसके बाद अदालत ने फैसला सुनाने के लिए सोमवार की तारीख तय की थी।मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि मृतक की पत्नी, जिसे पुलिस ने आरोपी बनाया था, घटना के समय लगभग आठ महीने से मृतक से अलग रह रही थी। साथ ही, दोनों के बीच तलाक का मामला पहले से ही दिल्ली की एक अदालत में विचाराधीन था।सभी तथ्यों ,साक्ष्यों व गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद एडीजे अमित गौतम की अदालत ने पुलिस द्वारा बनाए गए सभी आरोपियों को सोमवार को बरी कर दिया। हालांकि अदालत का आदेश अपलोड़ नहीं हुआ है।यह फैसला न केवल आरोपियों के लिए राहत लेकर आया, बल्कि पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े कर गया है।

